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सावधान! पुलिस मंच पर है

Saturday, August 31, 2013

'कवरेज' (लघुकथा )

  
    
 शिखा और उसका कैमरामैन बड़ी फुर्ती से भाग -भाग कर आपदाग्रस्त लोगों का साक्षात्कार और तस्वीरें ले रहे थे ! इतने सारे मीडिया कर्मियों के बीच फंस-फंसकर निकलना और पीड़ितों तक पहुँचना आसान न था ! मीडिया वाले पीड़ितों का आँखों देखा हाल दिखने की होड़ में ऐसे लपक रहे थे , जैसे कई दिनों का भूखा शेर शिकार देखकर उस पर लपकता है ! तभी शिखा की नज़र एक व्यक्ति पर पड़ी , जो कि बहुत क्षीण लग रहा था और कराहते हुए "पानी ........ पानी ...." की आवाज़ लगा रहा था ! अभी तक किसी मीडिया कर्मी की कृपादृष्टि उस पर नहीं पड़ी थी ! शिखा बिना एक भी क्षण गंवाये हाथ में माइक लिए हुए उसकी ओर लपकी , पीछे- पीछे कैमरा मैन भी ! 

      "आप यहाँ कब से फंसे हैं ?" .......... शिखा ने पीड़ित के मुरझाते हुए चेहरे के आगे माइक किया ! पीड़ित ने अधमुँदी आँखों से उसकी ओर देखा और कमजोर हाथ की तीन उंगलियाँ उठा दीं !

   "तीन दिन से आपकी मदद के लिए कोई नहीं आया ?"  शिखा ने अगला प्रश्न दागा ! पीड़ित "पानी .......पानी ......." से आगे कुछ न बोल सका !
"आपके साथ परिवार के और भी लोग थे ? हमें उनके बारे में कुछ बतायेंगे ?"  .........शिखा हिम्मत हारने को तैयार न थी ! माइक ने इस बार भी "पानी ! पानी ......." के सिवा कोई स्वर न सुना ! 

     झुकी हुई शिखा सीधी खड़ी हो गयी और कैमरामैन उसकी आँखों का संकेत पा चुपचाप उसके पीछे -पीछे चल दिया ! पीछे से "पानी ........पानी ......." का स्वर बिना माइक के भी थोडा ऊँचा  हुआ , फिर बंद हो गया ! 

       कैमरामैन ने पीछे मुड़कर देखा , स्वर के साथ -साथ पीड़ित की आँखों और शरीर की हरकत भी बंद हो चुकी थी ..............!

 रचना त्यागी 'आभा'
मालवीय नगर, नई दिल्ली