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Saturday, March 16, 2013

शोभना फेसबुक रत्न सम्मान प्रविष्टि संख्या - 21

''निर्भया'' की कुर्बानी  मत भूलना !!


तुम्हारे नाज़ुक  ज़िस्म पर हैवानियत का हमला ,
दरिंदगी की इन्तिहां मुश्किल था संभलना   !

नोंच दिया अंग-अंग वहशी थे खूंखार ,
रो पड़ी मानवता सुनकर तेरा चीत्कार!

हे बहादुर बेटी !तेरे साहस को सलाम !
तू कड़की बनकर 'दामिनी' झंकझोर दी अवाम ! 

तेरी जिजीविषा ने सबको जगा  दिया ,
नारी के आगे  मस्तक  पुरुष  का झुका  दिया !

दामिनी की आह से उठा है जो तूफ़ान ,
भारत की हर बेटी तक पहुंचा दो वो पैगाम !

''निर्भया''बन करना हैवानों का सामना !
न भूलना कुर्बानी बस ये है कामना !!

रचनाकार: सुश्री शिखा कौशिक 
कांधला, शामली