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Sunday, January 20, 2013

शोभना फेसबुक रत्न सम्मान प्रविष्टि संख्या- 1

जो कुछ भी था दरमियाँ याद है

तेरे सुर्ख होठों की नरमियाँ याद है
तेरी सर्द आँहों की गरमियाँ याद है
कुछ भी तो नहीं भूले हुम आज भी
जो कुछ भी था दरमियाँ याद है....

याद है बिन तेरे वो शहर का सूनापन
संग तेरे वो गाँव की गलियाँ याद है
याद है वो महकता हुआ गुलशन
वो खिलती हुई कलियाँ याद है.......

याद है तेरी आँखों की वो मस्तियाँ
तेरी जुल्फों की वो बदलियाँ याद है
कुछ भी तो नहीं भूले हुम आज भी
जो कुछ भी था दरमियाँ याद है ..

याद है कल वो बीता हुआ...........
वो हारी हुई बाज़ी, पल वो जीता हुआ
संग तेरे लम्हों का यूँ गुजरना याद है
याद है बीन तेरे मौसम वो रीता हुआ
  
याद है वो तेरी आँखों का काजल
वो तेरी जुल्फों का लहराता बादल याद है
कुछ भी तो नहीं भूले हम आज भी
वो तेरे इश्क में मन भँवरा पागल याद है

तेरे सुर्ख होठों की नरमियाँ याद है
तेरी सर्द आँहों की गरमियाँ याद है
कुछ भी तो नहीं भूले हुम आज भी
जो कुछ भी था दरमियाँ याद है....

रचनाकार: श्री दिनेश गुप्ता


मंदसौर, मध्य प्रदेश