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Wednesday, December 5, 2012

शोभना काव्य सृजन पुरस्कार प्रविष्टि संख्या - 5


विषय - कन्या भ्रूण हत्या
 


 फूल -सी बच्ची गर्भ की,कुचल रहे क्यों आज ?


क्यों  बेटे की चाह में,दानव बना समाज ?


बेटी हीं हैं देवियाँ ,दुर्गा की अवतार |


यहीं करेंगी फिर यहाँ ,दनुजों का संहार |।

 तू भी तो बेटी रही ,मिला  तुझे सम्मान |


फिर अपनी हीं कोंख का ,क्यों करती अपमान ।।

मंदिर में देवी पूजै, बगुला भगत समाज |


बेटी के दुश्मन बने ,घर वाले हीं आज |।

दानव से मानव बनो , हरो मनुज की पीर |


भ्रूण हत्या को बंद कर ,बहा प्रेम का नीर |

रचनाकार - डॉ. मनोज कुमार सिंह 



आदमपुर [सिवान], बिहार |