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Tuesday, April 14, 2015

'नो कमेंट' पर मेरा कमेंट


दोस्तो अभी-अभी सुमित प्रताप सिंह की नयी पुस्तक 'नो कमेंट' पढ़ कर ख़त्म की है। पुस्तक ने दिमाग़ को झकझोर कर रख दिया है। इतनी छोटी सी उम्र में किसी को ज़िन्दगी का इतना अनुभव कैसे हो सकता है? मेरे मतानुसार व्यंग्य साहित्य की सबसे मुश्किल विधाओं में से एक है पर सुमित की लेखनी में वो प्रवाह है कि लगता है कि व्यंग्य लिखना बहुत आसान होता होगा। इतनी आसानी से समाज की हर विसंगति पर इतनी सटीक चोट की है कि संवेदनशील व्यक्ति तिलमिला उठता है। यही व्यंग्य की सार्थकता है। उम्मीद की एक नयी किरण नज़र आ रही है। व्यंग्य का भविष्य मज़बूत और क़ाबिल हाथों में है।
इतनी अच्छी पुस्तक के लिए बधाई सुमित और एक और नयी पुस्तक के लिए अग्रिम शुभकामनाएँ।

प्रमोद शर्मा 'असर'
हौज़ ख़ास, नई दिल्ली