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एंटी रोड रेज एंथम: गुस्सा छोड़

Friday, December 13, 2013

कहानी: टोटका

   
   माँ आँगन के गेट के बाहर निकलने को हुईं तो फिर से उन्हें चावल, सिंदूर और बाल गेट के बीचों-बीच रखे मिले. आज फिर से कोई टोटका कर गया था. माँ टोटका करनेवाले को गरियाते हुए वापस घर को लौट आईं. मैंने जब जाकर डंडे से उस सामान को एक ओर खिसका कर किया तब माँ घर से निकलीं. कुछ दिनों से हम सब परेशान थे. कारण था हमारे घर के आस-पास टोटका किया जा रहा था.
हमारा परिवार कालोनी में अपने काम से काम रखनेवाले परिवार के रूप में जाना जाता है. यही कॉलोनी वालों के लिए ईर्ष्या का विषय है. वैसे तो हमारे घर के आस-पास टोटका होना कोई नहीं बात नहीं थी, लेकिन कुछ दिनों से ये कुछ ज्यादा होने लगा था. सही मायने में कहा जाए तो टोटका उन कायरों और असफल व्यक्तियों का हथियार है, जो यह सोचते हैं कि टोटका करके वे किसी का अहित कर अपना भला कर सकते हैं.
हालाँकि हमें कुछ हद तक पता चल चुका था, कि टोटका करने के पीछे किसका हाथ था, क्योंकि कालोनी के जासूस टाइप के लड़कों से अपना पक्का याराना रहता था. उन्होंने ही बताया था, कि सुबह के अंधेरे में उन्होंने कुछ भली महिलाओं को हमारे घर के इर्द-गिर्द टोटका करने के लिए मंडराते हुए देखा था. वैसे हमें भली-भांति ये भी मालूम था कि टोटका करने में सिद्धहस्त उन महिलाओं का पारिवारिक जीवन कुछ अधिक खुशहाल नहीं था. शायद यही वजह थी, जो वे अपनी खुशहाली पाने की खातिर हमारे घर की खुशहाली पर टोटके के रूप में बुरी नज़र डालती रहती थीं.
ऐसी बात नहीं है कि केवल हम ही टोटका करनेवालीं भली महिलाओं से परेशान थे, कालोनी में रहने वाले अधिकांश लोग उनकी टोटकेबाजी से तंग आ चुके थे. हर समस्या का हल भी अवश्य होता है, सो हमारा परिवार भी इस समस्या का हल खोजने में जुट गया. सबने अपने-अपने सुझाव बताये, लेकिन कोई भी जंचा नहीं. अंत में छोटी बहन ने इस टोटकेबाजी से हमें मुक्त कराने का बीड़ा उठाया. हमारे घर में लोकतान्त्रिक व्यवस्था है, इसलिए हम यह नहीं सोचते कि कौन छोटा है या फिर कौन बड़ा. सो हमने घर की सबसे छोटी सदस्या को बिना कोई प्रश्न पूछे यह कार्य सौंप दिया.
अब छोटी बहन अपने कार्य में जुट गई. उसके कार्य के लिए जो जरूरी सामान उसने माँगा, उसे लाकर दे दिया गया. उसके जरूरी सामान पर नज़र डालें तो वह कुछ यूँ था - गुंथा हुआ आटा, काला धागा, चने की दाल, हरी मिर्चें, सिंदूर, कुछ सुइयाँ, कुछ बाल और एक नींबू. हमारे मन में ये ख्याल तो आ रहे थे, कि आखिर इस सामान का वह करेगी क्या, लेकिन हमें उसकी प्रतिभा पर पूरा यकीन भी था, सो हमने उसे जो उसका करने का मन था करने दिया.
वह अपने कमरे में अपने काम को अंजाम देने में व्यस्त थी और हम सभी दूसरे कमरे में यह सोचने में व्यस्त थे, कि आखिर वह करने क्या जा रही थी. घड़ी की सबसे तुच्छ सेकंड की सुई पर कभी ध्यान न देनेवाला मैं अति व्यस्त मानव आज सेकंड की सुई के पीछे लगा हुआ था. परिवार के बाकी सदस्य खाली बैठे क्या करते सो वे सभी अनुमान नामक शब्द का सदुपयोग करने लगे. करीब आधा घंटा हो चुका था. सेकंड की सुई मेरी नज़रों से तंग आ चुकी थी और परिवार के सदस्यों के सारे अनुमान अनुमानों की नदी में डुबकी लगाकर डूबकर खत्म हो चुके थे.
अचानक छोटी बहन ने अपने कमरे का दरवाजा खोला. अब हम उसके मुँह खुलने और उसकी योजना सुनने का इंतज़ार करने लगे. उसने थाली में रखी आटे की गुड़िया हमें दिखाई तो हमें बहुत गुस्सा आया, कि इतनी देर से कमरे में आटे का प्रयोग करके मूर्तिकला में समय नष्ट किया जा रहा था. वह हमारा गुस्सा भाँप गई और उसने अधिक समय न गँवाते हुए अपना आईडिया बताया. उसने बताया कि जैसे लोहा लोहे को काटता है, वैसे ही टोटके को टोटका ही खत्म करेगा.
अब उसने उस आटे की गुड़िया के सिर में बाल लगाये, उसके माथे पर सिंदूर लगाया, उसके गले में चने की दाल व हरी मिर्च से बनी हुई माला पहनाई, उसके पूरे शरीर में सुइयाँ घुसाईं और उसके साथ कटा नींबू रखकर घर के पिछले दरवाजे के पास टोटकेवाली आंटी के पति की खड़ी हुई मोटर साइकिल के ऊपर चुपचाप जाकर रख दिया.
अब हम उस गुड़िया को देखकर उत्पन्न होनेवाली प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा करने लगे. दोपहर हुई, दोपहर बीती और शाम हुई. हमारे दिल में धुकधुकी सी हो रही थी. अचानक ब्लॉक में चीख-पुकार आरम्भ हो गई. उस चीख-पुकार में हम कुछ आवाजें ही सुन पाए.
“देखो यह पक्का किसी तांत्रिक ने टोटका किया है.”
“अरे इस गुड़िया के सिर में घुसी सुइयाँ तो देखो. ये सुइयाँ इसके सिर में इसलिए घुसाई गईं हैं जिससे कि जिस पर भी टोटका हो उसके सिर में भयंकर दर्द उठ जाए और दिमाग सुन्न हो जाए.”
“और इसके गले में लटकी चने की दाल और हरी मिर्च की माला यह बताने के लिए काफी है, कि इस टोटके को करनेवाला कोई अघोरी तांत्रिक है.”
“अरी बहन इस गुड़िया के बाल हो न हो शमशान घाट में जली हुई किसी लाश के सिर से उखाड़े हुए हैं.”
“बुरा हो टोटका करनेवाले का. अभी हॉस्पिटल से फोन आया है कि अभी कुछ देर पहले ही मेरे पति का एक कार से एक्सीडेंट हो गया है और उनकी दायीं टांग टूट गई है.”
और फिर गालियों की ऐसी बौछार आरंभ हुई कि हम सबको कान में रुई ठूसनी पड़ी. इसके बाद सभी महिलाओं ने मिलकर ऊपर से नीचे तक पूरे ब्लाक को अच्छी तरह पानी से धोया और धूप-अगरबत्ती लगाई. टोटके में सिद्धहस्त महिलाएँ भी छोटी बहन के टोटके से ऐसी भयभीत हुईं कि उन्होंने टोटका करने से बिलकुल संन्यास ले लिया.
इस टोटके का एक लाभ भी हुआ. हमारे ब्लाक में रहनेवाले एक आलसी और कामचोर लड़के ने अगले दिन अपनी माँ से कहा कि उसका हमेशा बंद रहनेवाला दिमाग अचानक ही काम करने लगा है और अब वह नाकारा नहीं बैठ सकता तथा नौकरी करके अपने पैरों पर खड़ा होगा. उस लड़के की माँ के हृदय में अचानक टोटका करनेवाले के प्रति आदरभाव उत्पन्न हो गया. अब ये और बात थी कि पिछली शाम को टोटके करनेवाले को सबसे अधिक गरियाया उन्होंने ही था.
अब कॉलोनी इस बात से संतुष्ट हैं कि कॉलोनी में अब कोई टोटका नहीं होता है और हमारा परिवार कॉलोनी वालों की ओर से मन ही मन परिवार की छुटकी सदस्या को टोटकेबाजी से मुक्ति दिलाने के लिए अक्सर धन्यवाद देता रहता है.

लेखक: सुमित प्रताप सिंह

इटावा, नई दिल्ली, भारत 
चित्र:गूगल से साभार