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Sunday, October 13, 2013

कविता: एक माँ थी वो भी


रूप सौन्दर्य सम्पूर्ण 

वीरांगना महारानी

पति की प्रिया

माँ ममतामयी 

कैकेयी .
आदर्शों के युग में 
अपनी संतान का  हित 
त्याग न  सकी
दिलाया राम वनवास 
राज अपने पुत्र को ...
रघुकुल की रीत 
अमर कर गई .
बस इसी बात का 
दण्ड भोगती आ रही
 युगों से 
विमाता नाम से 
किसी ने नाम न दिया
किसी बेटी को
 अभी तक ...
 न लेती ऐसा वचन 
 राम बनते क्या 
मर्यादा पुरुषोत्तम ? 
कर पाते कैसे 
पिता आज्ञा पालन 
भाइयों का स्नेह 
वानर मित्रता 
सीता हरण 
रावन संहार .
रामराज्य स्थापना ?
राम ने माँ का सम्मान किया 
कभी दोष न दिया .
कैकेयी राम को 
चाहती थी तभी तो
 स्वयं बुरी बनकर 
राम को बना गई 
भरत -लखन- शत्रुघ्न 
के  प्रियवर भ्राता को 
मर्यादा पुरुषोत्तम राम ..
जग में पूज्य श्री राम .

ज्योतिर्मयी पन्त
चित्र गूगल से साभार