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Monday, August 12, 2013

सावन गीत

मेहा बार बार नीर बहाये
प्रियतम क्यों पीर बढ़ाए
सावन की अगन जिया जलाए
घेर घेर कर गरजे तड़पे भरमाए
मेहा बार ...............
पेड़ों पर छाई तरुणाई
हरियाली चंहु ओर छाई
प्रेम वृक्ष क्यों सूखा जाए
मेहा बार …………………………
कोयल कूके अंबवा डरियन
पीहू पीहू की गुहार लगाए
सुन सुन जिया जलता जाए
मेहा बार ……………………….
अन्नपूर्णा बाजपेई
कानपुर, उ.प्र.