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Tuesday, July 16, 2013

जुगनू


जुगनू ढूढता 
रोशनियों के घरोंदो मे 
जगमगाते गावं -शहर के दीपों मे 
अपने रिश्तें |
जुगनू जो खुद ही
रोशनी नहीं जानता
कितनी है |
रोशनियों की भीड़ मे 
उसकी क़द्र कोंन करेगा 
भीड़ भरी दुनिया मे 
अलग पहचान केसे बनायेगा |
शायद वह जान गया 
रोशनियों की चकाचोंध मे 
उसकी बखत नहीं |
अंधेरों को चीरते 
उड़ान की हिम्मत ने 
अंधेरों मे हजारों 
लोगों की आखों को 
दिखा दिया अपनी 
रोशनी का रूप |
नन्हे होसलों ने दिखाया 
अपना दम 
तभी आवाजें आई 
वो रहा जुगनू |

संजय वर्मा " दृष्टि "
१२५'शहीद भगत सिंग मार्ग 
मनावर, जिला -धार (म. प्र. )
 चित्र गूगल से साभार