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सावधान! पुलिस मंच पर है

Thursday, February 28, 2013

शोभना फेसबुक रत्न सम्मान प्रविष्टि संख्या - 12

तुम मुझ में एक जिस्म देखते हो, और मै तुम में एक रूह देखती हूँ, तुम एक पाक रूह हो, और मै एक पाक जिस्म हूँ, यूँ तो तुम बच्चों जैसे मासूम हो, पर तुम्हारी भूख आदमी जैसी है, यूँ तो मै भी यौवन से भरपूर हूँ, पर मुझे तलाश खुदा की है, जिस दिन तुम्हारा दिल, मेरे जिस्म में एक रूह तलाश ले, और मै तेरी रूह का जिस्म तलाशना चाहूँ, उस दिन तय करेंगें, मुलाकात का दिन, और फिर जीयेंगें ज़िन्दगी, भले ही कुछ लम्हों की ....

रचनाकार: सुश्री नीलम नागपाल मैदीरत्ता


गुडगाँव, हरियाणा