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Saturday, January 26, 2013

गीत: जियो वतन के वास्ते

जियो वतन के वास्ते
मरो वतन के वास्ते 
माटी का कर्ज़ चुकाने को
कुछ करो वतन के वास्ते

उनका भी क्या जीना है
जो खुद ही जीते-मरते हैं
जो मिटते देश की खातिर
वो मरके भी न मरते हैं
अब तक जिए अपनी लिए 
कभी मरो वतन के वास्ते
जियो वतन के...

शिकवा हो न शिकायत हो
वतन की दिल इबादत हो
वो ही सच्चा आशिक है
जिसके दिल में इसकी चाहत हो
आए कोई भी तूफां 
न डरो वतन के वास्ते
जियो वतन के...

वीर कभी श्रृंगारों में 
वक्त नहीं जाया करते 
मौसम कुर्बां होने के 
न बार-बार आया करते 
जब भी धरा पुकारे तुमको 
न डरो वतन के वास्ते
जियो वतन के...

लेखक- सुमित प्रताप सिंह






नई दिल्ली