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Sunday, December 30, 2012

शोभना काव्य सृजन पुरस्कार प्रविष्टि संख्या - 14

विषय: नारी शोषण


जैसे कोई छिपे,

अपनी आवाज़ के पीछे,

छिपे कोई किसी की बाहों में,

छिपे कोई बहस के आखिरी वाक्य में,

बहस की जीत में,

विजय में,

विजय पताका में,

एक ऐसे भयानक हादसे के बाद,

प्रेम की निष्ठुरता से ज्यादा भयानक कोई हादसा,

जिसमें उभारा गया हो आपका स्त्रीमन पूरी तरह,

जैसे वहशी हाथों से,

मानो, दरिंदो के हाथों से,

लगभग बलात्कार,

आज़ाद ज़िन्दगी का,

और फिर छिपना पुलिसिया फाइल में,

कागज़, अक्षर, कलम, दवात में,

जिससे हो जाये सब सफ़ेद, सफ़ेद,

जबकि वहां और उकेरा जाना था,

हादसे को,

और क्या उसे सिर्फ दफ़न करना था,

हादसे को,

सुलझाने की बजाए,

मिटाना खून के धब्बों को,

सुलझाने की बजाए,

और मुमकिन नहीं था ये,

मुमकिन था बहुत भयानक,

लम्बी, चौड़ी बहस करना,

इतनी बहस करना,

साफ़ सुलझे शब्दों में,

बेहद परिष्क्रित,

विदेशज भी शब्दों में,

इतनी बहस कि बचे नहीं,

शब्दों के अलावा दुनिया में कुछ,

गूढ़ तार्किक शब्दों के अलावा,

कूटनीतिक बहस के अलावा.

रचनाकार - सुश्री पंखुरी सिन्हा 



कैलगरी, कनाडा