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Saturday, September 22, 2012

कविता: जीवन पानी का बुलबुला है



*चित्र गूगल से साभार*

जीवन, आदमी का अगर 
पानी का बुलबुला है 
आदमी, फिर क्यों
तूफान से टकराने चला है

अवसादों का गहरा 
असीम सागर है-अगर जीवन 
लहर-लहर इसकी गीत है क्यों 
और गीत जो चुलबुला है.

पाँव के नीचे धरती है-आदमी के 
आकाश बाँहों में 
सभी कुछ तो है, आदमी का 
आदमी के लिए 
जीत का सिलसिला है

कौन कहता जीवन आदमी का 
पानी का बुलबुला है.


रचनाकार- श्री सुरेश यादव

संपर्क- 09717750218