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Tuesday, July 24, 2012

अन्ना ही क्यों आहुति तो हम सभी को देनी चाहिए


     कुछ ही दिन बाद हम अपने देश के स्वाधीनता की ६६वी सालगिरह मनाने वाले है.क्या हम वाकई इस अवसर को मनाने के हकदार हैं?.यदि हाँ तो क्यों नहीं हमें सभी तरह की स्वतंत्रता प्राप्त है. हमें केवल कागजी तौर पर ही आज़ादी प्राप्त  है.हमें  अपने विचारों को व्यक्त करने से भी रोका जाता है. उन्हें दबाने के लिए साम,  दाम, दंड, भेद सभी उपायों को अपनाया जाता है. आम आदमी तो दूर हमारे प्रतिनिधियों तक को बख्शा नहीं जाता जैसा कि हमें जेपी से लेकर अन्ना हजारे तक कई बार देखने को मिल चुका है. ज्यादा पुरानी बात नही उसी तरह के उद्देश्य को लेकर अन्ना हजारे और उनकी टीम ने  एक बार फिर२५ जुलाई को भ्रष्टाचार की रोकथाम के लिए जन लोकपाल बिल को उसके उचित स्वरुप में लागू करवाने के लिए अनशन की घोषणा की है.
                                           हमारे लिए सोचने की बात यह है कि क्या इस देश का नागरिक होने के बाद भी अपने विचारों को आगे बढ़ाने की स्वतंत्रता नहीं.खैर अन्ना की इस  क्रांति का परिणाम जो भी हो इतना ज़रूर है कि दूसरी आज़ादी की लड़ाई के लिए एक बार फिर महात्मा गाँधी का प्रतिरूप हमारे साथ है जिसका लड़ने का तरीका भी अहिंसावादी है विचार/व्यवहार सभी गांधीवादी है तो फिर क्यों नहीं हम सभी भारतीयों को इस महात्मा की नई अगस्त क्रांति में अपने समर्थन की आहूति  देनी चाहिए.जन आंदोलनों तथ संसदीयप्रक्रियाओं के बीच एक सहयोग और टकराव के द्वन्द से लोकतंत्र और मज़बूत होगा.आपातकाल को याद रखना  भी ज़रुरी है.क्योंकि वो हमारे इतिहास का कटु अध्याय है इसलिए किसी भी सत्ता को आन्दोलनों का मुकाबला प्रशासनिक नहीं बल्कि राजनैतिक तरीके से करना चाहिए .अगर हम अपनी बात कहने के लिए शांतिपूर्ण तरीका अपनाते है तो वो लोकतंत्र को मजबूत करता है.हम पहले हुए आंदोलनों को देखें तो जेपी आन्दोलन के दूरगामी परिणामों ने लोकतंत्र को और परिपक्व बनाया.इस आन्दोलन में भ्रष्टाचार बड़ा मुद्दा था ,इस तरह के आंदोलनों से लोकतान्त्रिक प्रक्रिया को खुद की कमी दूर करने का अवसर मिलता है.अन्ना ने सरकार को अपनी ही रणनीतियों पर बार बार विचार को मजबूर भी किया.अन्ना का चाहिए है कि सरकार को अन्ना के आन्दोलन को मिस्र या अन्य अरब देशों में बने बगावती हालात बनने के पहले शांत करवाना चाहिए. कहीं ऐसा न हो कि हुस्नी मुबारक जैसी स्थिति हमारे नेताओं की हो जाये. वैसे विश्वास में कमी,मानवीय मूल्यों में कमी,अपनेपन की कमी जैसी कमियों की भावना भ्रष्टाचार को जन्म देती है.स्वार्थ असुरक्षा की भावना भी एक अन्य कारण है.आज हमारा देश जनसँख्या में विश्व का छटवा देश है.भारत के नागरिकों को अपनी संस्कृति और आध्यात्मिकता पर गर्व होना चाहिए.प्रगति और खुशहाली का सही अर्थ हर ओर खुशी होता है.हम सभी को इस के लिए एक मजबूत और भ्रष्टाचार मुक्त,प्रगतिशील राष्ट्र बनाने में संलग्न हो जाना चाहिए.और प्रण करना चाहिए की न खुद भ्रष्ट बनेगे और ना ही देश को भ्रष्टाचार की गर्त में जाने देंगे चाहे इसके लिए एक जुट होकर संघर्ष क्यों ना करना पड़े.क्यों ना हमें अपना सर्वस्व न्योछावर करना पड़े हम इसे अपना कर्तव्य समझकर सदैव इस के लिए प्रयासरत रहेंगे..... !यह देखना दिलचस्प होगा की सरकार इस बार क्या कदम उठती है. इस आन्दोलन के बाद जिस से देश सच्चे अर्थों में भ्रष्टाचार मुक्त और प्रगतिशील बने......