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Monday, June 4, 2012

फल (लघु कथा)


   र्मा जी रोज की तरह अपनी बूढ़ी पत्नी के साथ सुबह की सैर पर निकले. चलते-चलते पुरानी यादों में खो गए. शर्मा जी को शादी के कई सालों तक संतान न होने से वह बिल्कुल  टूट चुके थे. मंदिर, मस्जिद,चर्च हो या फिर गुरुद्वारा कोई ऐसी जगह नहीं छोड़ी थी, जहाँ उन दोनों ने जाकर अपना सिर न पटका हो. आखिर एक दिन  उनकी मेहनत रंग लाई और उनके यहाँ एक  सुन्दर बेटा पैदा हुआ.