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Thursday, May 24, 2012

एक पत्र पेट्रोल भईया के नाम

प्यारे पेट्रोल भईया


सादर तेलस्ते!

    तुम्हारे और मंहगा होने के बाद आज संता अपना स्कूटर लेकर पेट्रोल पम्प गया. जब सेल्समैन ने पूछा कि कितने का पेट्रोल डालूं तो वह दुखी हो बोला, " पाँच- दस रूपये का पेट्रोल स्कूटर के ऊपर छिड़क दे. आज इसमें आग लगानी है." हा हा हा! बहुत हंसी आ रही होगी न तुम्हें इस घटना को सुनकर. ख़ुशी के मारे उछल रहे होगे. खुद का रेट बढ़ाने पर सरकार को खूब शाबासी दे रहे होगे. तुमने इस घटना का मज़ा तो खूब लिया लेकिन क्या संता के रूप में उस आम आदमी की पीड़ा को समझने की थोड़ी सी भी कोशिश की जो दिन- प्रतिदिन तुम्हारे चढ़ते भाव को किस तरह झेल रहा है. सुना है कि धरती के भीतर जीवाश्मों के सैकड़ों साल सड़ने के बाद तुम बनते हो. तो जिस तरह तुम बनते हो उसी तरह का दिल भी रख लिया. बहुत खूब. बहुत खूब. बहरहाल ऐसा नहीं है कि तुम्हारे द्वारा किसी का भला न हुआ हो. अरब देशों पर तुम्हारी विशेष कृपा हुई है और वो फटेहाल से संपन्न हो गए. तुम न थे तो वहां के कबीले भुखमरी से दुखी हो एक-दूसरे की जान के दुश्मन बने रहते थे. रेगिस्तान की धरती में कुछ उपजता था नहीं सो कभी इस देश पर हमला बोल लूटपाट की तो कभी उस देश पर. तुम आये तो उनका जीवन ही बदल गया. अब अरब के शेख या कहें अरब के तेली ऐश का जीवन जी रहे हैं और जीवन के सारे सुख ले रहे हैं. इसके अलावा तुम आतंकवाद के लिए भी संजीवनी बन चुके हो. तुम्हारे द्वारा हुई आय का एक बड़ा हिस्सा जिहाद के नाम पर आतंकवादियों को दे दिया जाता है. यदि तुमसे अरब देशों को लाभ हुआ है तो तुम्हारे साइड इफैक्ट भी वो सब झेल रहे हैं. तुम्हें पाने की खातिर दुनिया के दादा अमरीका ने ईराक की नैया डुबो दी व यमन, मिश्र व लीबिया जैसे देशों में जनविद्रोह के माध्यम से सत्ता पलटवा डाली. अब उसकी टेढ़ी नज़र ईरान पर लगी हुई है. देखें तुम्हें पाने की लालसा में ईरान कब अमरीका द्वारा तबाह होता है. तुम रोज मंहगाई की सीढ़ी चढ़ते जा रहे हो. तुम्हारे पीछे-२ तुम्हारा भाई डीजल व तुम्हारी बहना सी.एन.जी. भी अपने रेट बढ़ा कर तुम्हारा पीछा पकड़े हुए हैं और आम आदमी का जीना दूभर किये हुए हैं. तुम जब भी बढ़ते हो, मंहगाई की सीढ़ी चढ़ते हो तो जीवन की अन्य जरूरी आवश्यकताओं पर भी असर डालते हो. तुम्हारे मंहगा होने का बहाना कर वो भी अपने भाव बढ़ा लेती हैं और बेचारा आम आदमी खून के आंसू पीने को विवश हो जाता है. तुम अपने भाई डीजल व बहन सी.एन.जी.के साथ जिस रफ़्तार से मंहगे होते जा रहे हो उससे तो ऐसा ही लगता है कि पैदल चाल चलने और साइकिल चलाने के दिन फिर से आने वाले हैं. और क्या लिखूं आपके आगे तो अंधे के आगे रोना/ अपने नैना खोना की भाँति ही है.

बाकी फिर कभी

तुम्हारे बढ़ते दामों की मार सहता